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भारतीय चित्रकला (Indian Paintings)

प्रागैतिहासिक और प्राचीन भित्ति चित्र (Prehistoric & Murals)

  • भीमबेटका गुफाएं: मध्य प्रदेश की ये गुफाएं प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्रों, शिकार के दृश्यों और हरे-लाल रंगों के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • सदांग (छह अंग): प्राचीन ग्रंथों के अनुसार भारतीय चित्रकला के छह मुख्य नियम रूपभेद, प्रमाण, भाव, लावण्य योजना, सादृश्य और वर्णिकाभंग हैं।
  • भित्ति चित्र (Murals): गुफाओं या महलों की ठोस दीवारों पर विशाल पैमाने पर बनाए जाने वाले स्थायी चित्रों को भित्ति चित्र कहते हैं।
  • अजंता के चित्र: गुप्त-वाकाटक काल के ये चित्र मुख्य रूप से बौद्ध जातक कथाओं और पद्मपाणि बोधिसत्व की करुणा को दर्शाते हैं।
  • फ्रेस्को तकनीक: अजंता में गीले प्लास्टर पर प्राकृतिक रंगों को मिलाकर चित्र बनाने की अनूठी फ्रेस्को (Fresco) पद्धति अपनाई गई थी।
  • बाघ की गुफाएं: मध्य प्रदेश में स्थित ये गुफा चित्र अजंता के समकालीन हैं, लेकिन इनका विषय अधिक धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक है।
  • बादामी और सित्तनवासल: चालुक्य कालीन बादामी और जैन धर्म से प्रेरित सित्तनवासल के चित्र दक्षिण भारतीय प्रारंभिक भित्ति कला के उदाहरण हैं।
  • लेपाक्षी चित्रकला: आंध्र प्रदेश के वीरभद्र मंदिर की छतों पर विजयनगर राजाओं द्वारा पौराणिक कथाओं के जीवंत दृश्य उकेरे गए हैं।

लघु चित्रकला और मध्यकाल (Miniature Art)

  • लघु चित्र (Miniature): कागज़, ताड़पत्र या कपड़ों पर अत्यंत सूक्ष्म और बारीक विवरण के साथ बनाए जाने वाले छोटे आकार के चित्र।
  • पाल शैली: पूर्वी भारत में ताड़ के पत्तों पर बौद्ध ग्रंथों को सचित्र करने वाली यह भारत की शुरुआती लघु चित्रकला थी।
  • अपभ्रंश शैली: पश्चिमी भारत (गुजरात-राजस्थान) की इस जैन शैली में चटक रंगों और इंसानों की उभरी हुई आँखों की प्रधानता थी।
  • मुगल चित्रकला: फारसी और स्वदेशी भारतीय शैलियों के समन्वय से जन्मी इस कला में दरबारी वैभव और यथार्थवाद मुख्य था।
  • अकबर का योगदान: अकबर ने शाही कारखानों की स्थापना की, जहाँ ‘हम्जानामा’ और ‘रज्मनामा’ जैसे महाकाव्यों को सचित्र अनुवादित किया गया।
  • जहाँगीर का स्वर्णकाल: जहाँगीर के समय मुगल कला शीर्ष पर थी; इस दौरान शिकार, जानवरों, पक्षियों और प्राकृतिक दृश्यों के चित्र बने।
  • मंसूर और अबुल हसन: उस्ताद मंसूर (पक्षी चित्रकार) और अबुल हसन जहाँगीर के दरबार के सबसे महान और प्रसिद्ध चित्रकार थे।
  • शाहजहाँ और पतन: शाहजहाँ के काल में रेखाचित्रों में कृत्रिमता बढ़ी, और औरंगज़ेब के समय राजकीय संरक्षण समाप्त होने से कला बिखर गई।

क्षेत्रीय लघु शैलियाँ (Regional & Hill Schools)

  • राजस्थानी शैली: मुगल प्रभाव से मुक्त होकर इस शैली में भक्ति आंदोलन, राधा-कृष्ण के प्रेम और रागमाला को चित्रित किया गया।
  • मेवाड़ और मारवाड़ शैली: इसमें चटक लाल-पीले रंगों का प्रयोग और दरबारी जीवन के साथ शिकार के दृश्यों की भरमार देखने को मिलती है।
  • किशनगढ़ शैली: निहालचंद द्वारा निर्मित ‘बनी-ठनी’ चित्र इसी शैली का है, जिसे भारतीय वास्तुकला की “मोनालिसा” कहा जाता है।
  • पहाड़ी चित्रकला: हिमालय की वादियों (हिमाचल और जम्मू) में पनपी इस शैली पर कोमलता, प्रकृति और गीत-गोविंद का गहरा प्रभाव था।
  • बसोहली शैली: पहाड़ी कला की यह सबसे प्राचीन शैली है, जो अपने तीखे चेहरों और चटक भड़कीले रंगों के लिए जानी जाती है।
  • कांगड़ा शैली: राजा संसार चंद के संरक्षण में विकसित इस कला में कोमल रेखाओं और शांत रंगों का सुंदर प्रयोग हुआ।

लोक चित्रकला परंपरा (Folk & Tribal Art)

  • मधुबनी पेंटिंग: बिहार के मिथिला क्षेत्र की महिलाओं द्वारा चावल के पेस्ट और प्राकृतिक रंगों से बनाई जाने वाली पारंपरिक लोक कला।
  • पट्टचित्र कला: ओडिशा की इस कला में कपड़ों पर भगवान जगन्नाथ और कृष्ण लीला की कथाएं बारीकी से चित्रित की जाती हैं।
  • वारली चित्रकला: महाराष्ट्र के आदिवासियों द्वारा ज्यामितीय आकारों (त्रिभुज, वृत्त) से मिट्टी की दीवारों पर रोजमर्रा का जीवन दर्शाना।
  • कलमकारी कला: आंध्र प्रदेश में हाथ से नक्काशीदार बांस के पेन (कलम) और प्राकृतिक रंगों से सूती कपड़ों पर की जाने वाली पेंटिंग।
  • फाड़ चित्रकला: राजस्थान की यह एक लंबी स्क्रॉल पेंटिंग है, जिसमें स्थानीय लोक देवताओं (जैसे पाबूजी) की गाथाएं गाई जाती हैं।

आधुनिक चित्रकला (Modern Era)

  • कंपनी शैली: औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश अधिकारियों के लिए भारतीय चित्रकारों द्वारा वाटरकलर से भारतीय डाक, त्योहारों और वनस्पतियों के चित्र बनाना।
  • राजा रवि वर्मा: इन्होंने पश्चिमी तेल चित्रण (Oil Painting) तकनीक को भारतीय पौराणिक विषयों और साड़ियों में लिपटी देवियों के साथ जोड़ा।
  • बंगाल स्कूल: अवनींद्रनाथ टैगोर और नंदलाल बोस ने पाश्चात्य कला का विरोध कर ‘भारत माता’ जैसे चित्रों से स्वदेशी कला को पुनर्जीवित किया।

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